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14-15 जून 2014, को सूचना भवन सभागार, रांची (झारखंड) में झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा द्वारा दो दिवसीय अन्तर्देशीय सेमिनार आयोजित होना जा रहा है. इस सेमिनार में आपकी भागीदारी आमंत्रित है.

'आदिवासी दर्शन और समकालीन आदिवासी साहित्य सृजन'

दो दिवसीय अन्तर्देशीय सेमिनार

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...राज्य सत्ता के दमन और कॉरपोरेट लूट के खिलाफ.घोषणा-पत्र देखें >

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हम न झुके हैं, न ही कभी झुकेंगे
आदिवासी/देशज समुदाय दो हजार सालों से युद्ध में हैं.

जोहार! देश के आदिवासी/देशज समुदाय कभी नहीं हारे, चाहे मिथक हो, इतिहास हो या कि वर्तमान. हमने घुटने कभी नहीं टेके. चाहे मिथक हो, इतिहास हो या कि वर्तमान. हुलगुलान जिंदाबाद!!

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पुस्तकें ऑनलाइन उपलब्ध हैं
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